आर्थिक रूप से सक्षम जीवनसाथी को नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता: दिल्ली हाई कोर्ट

हाल ही में Delhi High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि जीवनसाथी आर्थिक रूप से स्वतंत्र और स्वयं कमाने में सक्षम है, तो उसे गुजारा भत्ता (Alimony) देने की आवश्यकता नहीं है। इस फैसले को पारिवारिक कानून से जुड़े मामलों में एक अहम उदाहरण माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह स्पष्ट किया कि गुजारा भत्ता देने का उद्देश्य उस जीवनसाथी की आर्थिक मदद करना है जो खुद का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति अच्छी आय अर्जित कर रहा है या आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर है, तो उसे गुजारा भत्ता देने का आधार नहीं बनता।
अदालत ने कहा कि कानून का उद्देश्य किसी पक्ष को अनावश्यक आर्थिक लाभ देना नहीं, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना है।
कोर्ट ने क्या कहा?
Delhi High Court ने अपने फैसले में कहा कि:
यदि पत्नी या पति आर्थिक रूप से सक्षम हैं और नियमित आय कमा रहे हैं, तो उन्हें गुजारा भत्ता देने का कोई औचित्य नहीं है।
गुजारा भत्ता केवल उस स्थिति में दिया जाता है जब व्यक्ति स्वयं अपना जीवनयापन करने में सक्षम न हो।
अदालत को हर मामले में दोनों पक्षों की आय और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए।
गुजारा भत्ता से जुड़े कानून
भारत में गुजारा भत्ता से जुड़े कई प्रावधान मौजूद हैं, जिनमें प्रमुख रूप से:
हिंदू मैरिज एक्ट
आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 125
घरेलू हिंसा अधिनियम
इन कानूनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तलाक या अलगाव के बाद आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को जीवनयापन में कठिनाई न हो।
फैसले का क्या होगा असर?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर भविष्य में आने वाले कई मामलों पर पड़ सकता है। इससे अदालतों को यह स्पष्ट संदेश मिला है कि गुजारा भत्ता का फैसला करते समय दोनों पक्षों की वास्तविक आर्थिक स्थिति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
निष्कर्ष
Delhi High Court का यह फैसला पारिवारिक कानून के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यदि जीवनसाथी आर्थिक रूप से स्वतंत्र है, तो उसे गुजारा भत्ता देने का प्रावधान लागू नहीं होगा।

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