🇮🇳⚓ युद्ध के बीच ईरान ने भारत को कहा “धन्यवाद”, भारतीय बंदरगाह ने दिया शरण

पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और तनाव के बीच ईरान ने भारत का आभार व्यक्त किया। यह धन्यवाद इसलिए दिया गया क्योंकि भारत ने ईरानी नौसेना के युद्धपोत IRIS Lavan को केरल के कोच्चि बंदरगाह पर शरण लेने की अनुमति दी। �
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ईरान के राजदूत Mohammad Fathali ने भारत सरकार और स्थानीय अधिकारियों को “मानवीय सहयोग” के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को दर्शाता है। �
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🚢 क्यों मांगी ईरानी युद्धपोत ने भारत में शरण?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान का युद्धपोत IRIS Lavan तकनीकी समस्याओं के कारण सहायता चाहता था और उसने भारत से कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति मांगी थी। जहाज में लगभग 183 क्रू मेंबर और कई नौसैनिक कैडेट सवार थे। �
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भारत ने 1 मार्च को जहाज को प्रवेश की अनुमति दी और यह 4 मार्च को कोच्चि बंदरगाह पर पहुंचा, जहां उसे तकनीकी और लॉजिस्टिक सहायता दी जा रही है। �
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⚠️ युद्ध के बीच बढ़ा तनाव
यह घटना ऐसे समय में हुई जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। इसी दौरान ईरान का एक और युद्धपोत IRIS Dena श्रीलंका के पास समुद्र में हमले के बाद डूब गया, जिसमें कई नौसैनिकों की मौत हुई। �
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इस घटना के बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं और कई ईरानी जहाज सुरक्षित बंदरगाहों की तलाश में निकल पड़े।
🗣️ भारत ने क्यों दी अनुमति?
भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने कहा कि जहाज को बंदरगाह में आने देना मानवीय आधार पर लिया गया निर्णय था।
उनके अनुसार:
जहाज में युवा कैडेट भी सवार थे
जहाज तकनीकी समस्या से जूझ रहा था
इसलिए भारत ने मानवता के आधार पर मदद की
भारत ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वह इस संघर्ष में किसी पक्ष का समर्थन नहीं कर रहा, बल्कि शांति और संवाद की अपील कर रहा है। �
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🌍 भारत-ईरान संबंधों का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत की संतुलित कूटनीति सामने आती है। एक तरफ भारत के अमेरिका और पश्चिमी देशों से मजबूत संबंध हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ भी लंबे समय से आर्थिक और रणनीतिक सहयोग रहा है।
✅ निष्कर्ष:
ईरानी युद्धपोत को कोच्चि में शरण देने का फैसला केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि मानवीय पहल माना जा रहा है। इस घटना ने वैश्विक तनाव के बीच भारत की संतुलित विदेश नीति को भी उजागर किया है।

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